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Wednesday, February 24, 2010

स्नान का मंत्र


त्वं मात: सर्वभूतानां जीवनं तत्तु रक्षकम्।

स्वेदजोद्भिज्जजातीनां रसानां पतये नम:॥

स्नातोSहं सर्वतीर्थेषु ह्रदप्रस्रवणेषु च्।

नदीषु देवखातेषु इदं स्नानं तु मे भवेत्॥

‘जल की अधिष्ठात्री देवी ! मातः ! तुम सम्पूर्ण भूतों के लिए जीवन हो । वही जीवन, जो स्वेदज और उद्भिज्ज जाति के जीवों का भी रक्षक है । तुम रसों की स्वामिनी हो । तुम्हें नमस्कार है । आज मैं सम्पूर्ण तीर्थों, कुण्डों, झरनों, नदियों और देवसम्बन्धी सरोवरों में स्नान कर चुका । मेरा यह स्नान उक्त सभी स्नानों का फल देनेवाला हो ।’